शुक्रवार, 17 अगस्त 2012 | By: हिमांशु पन्त

कुछ हाइकु---बदरा रे।

कहाँ हो तुम,
अरे बदरा काले,
देर हो चली।
..........................
गरजता है,
पर बरसे नहीं,
है बेईमान।
..........................
बेचैन मन,
सुखी प्यासी धरती,
 है इन्तेजार।

4 comments:

बेनामी ने कहा…

खरगोश का संगीत राग रागेश्री पर आधारित है जो कि खमाज थाट का सांध्यकालीन राग है, स्वरों में कोमल निशाद
और बाकी स्वर शुद्ध लगते
हैं, पंचम इसमें वर्जित है, पर हमने इसमें अंत में पंचम का प्रयोग भी किया है, जिससे इसमें राग बागेश्री भी झलकता
है...

हमारी फिल्म का संगीत वेद नायेर ने दिया है.
.. वेद जी को अपने संगीत कि प्रेरणा जंगल में चिड़ियों कि चहचाहट से मिलती है.

..
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Sunil Kumar ने कहा…

सभी हाइकू अच्छे लगे बधाई

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