बुधवार, 16 सितंबर 2015 | By: हिमांशु पन्त

तु ही मेरा सांई

तु ही तो है मेरे जीवन की सच्चाई,
तु ही मेरा ईश्वर तु ही मेरा सांई।

तेरा रहे आशीष तो मैं कुछ भी कर जाऊं,
सांई तेरे चरनों में ही सब सुख पाऊं।
तेरे ही दम से हर खुशी पायी,
तु ही मेरा ईश्वर तु ही मेरा सांई।

हर समय तेरा ही आशीष मैं चाहुं,
तेरी ही धुली को माथे पे लगाऊं।
दर्द हो थोड़ा भी तो तेरी याद आयी,
तु ही मेरा ईश्वर तु ही मेरा सांई।

तु ही तो है किनारा और तु ही नैय्या,
मेरे इस जीवन का तु ही है खेवय्या।
भटका जो कभी तो तुने राह दिखायी,
तु ही मेरा ईश्वर तु ही मेरा सांई।

दर्श को तेरे प्यासी ये मेरी आंखें,
तुझ से ही दिन मेरे तुझी से हैं रातें।
अंधेरों में भी तेरी लौ जगमगायी,
तु ही मेरा ईश्वर तु ही मेरा सांई।

तेरे ही दम से हर खुशी पायी,
तु ही मेरा ईश्वर तु ही मेरा सांई।

5 comments:

Siddharth Garg ने कहा…

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anand.editsoft ने कहा…
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anand.editsoft ने कहा…

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