शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012 | By: हिमांशु पन्त

ग्रीष्म और यौवन - हाइकु

प्रचंड ग्रीष्म,
ज्यों यौवन प्रगाढ़,
हे देव कृपा.

4 comments:

मनोज कुमार ने कहा…

वाह!

Sunil Kumar ने कहा…

सुंदर अतिसुन्दर

Siddharth Garg ने कहा…

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Rajiv ने कहा…

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