सोमवार, 20 अगस्त 2012 | By: हिमांशु पन्त

हाइकु-जज्बात

मन की बात,
बने दिन भी रात,
हाय जज्बात.

3 comments:

Sunil Kumar ने कहा…

वाह बहुत सुंदर......

हिमांशु पन्त ने कहा…

bahut bahut dhanyawad sunil ji..

Siddharth Garg ने कहा…

Great post. Check my website on hindi stories at afsaana
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